पूर्ण सन्त कौन है।

पूर्ण गुरु की पहचान कैसे करे 

         वही पूर्ण सन्त होता है जो सभी धर्म ग्रन्थो का पूर्ण जानकर होता है। वह सर्व शास्त्रों के आधार पर सत्य साधना करता है और करवाता है। अगर आज वर्तमान में धर्म गुरुओं को देखे तो सभी लोकवेद के आधार पर अपना ज्ञान सुनाते है। कुछ सन्त धर्म ग्रंथों का नाम भी लेते हैं परन्तु तत्वज्ञान न होने से वे इन धर्मग्रंथों के गूढ़ रहस्य को समझ नही सकते।
          
              वर्तमान में केवल  "सतगुरु रामपाल जी महाराज "जी ही है जो सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकर है,उनके द्वारा बताई गई भक्ति विधि भी पूर्ण रूप से शास्त्रों से प्रमाणित है।

           दूसरी पहचान पूर्ण सन्त की ये है कि पूर्ण गुरु जब सत्य साधना का प्रचार करता है तो सभी नकली गुरु जनता द्वारा उसका विरोध करा देते हैं जबकि पूर्ण गुरु का ज्ञान शास्त्र प्रमाणित होता है।

          तीसरी पहचान यह है कि पूर्ण सन्त 3 प्रकार के मंत्रों  को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रन्थ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23सामवेद संख्या 822 में मिलता है । "सन्त रामपाल जी महाराज "जी ही पूर्ण सन्त है जो 3 प्रकार के मंत्रों का तीन बार मे उपदेश करतें हैं।

               आदरणीय नानक साहेब ने अपनी अमृतवाणी में कहा है कि:-           
            "सोय गुरु पूरा कहावे । दो अख्खर का भेद बतावे।"

            इसी प्रकार आदरणीय गरीबदास जी ने भी पूर्ण गुरु के बारे बताया है कि :-
           
            "सतगुरु के लक्षण कहूँ , मधुरे वेद विनोद।।
             चार वेद षट शास्त्र ,कह अठारा बोध।।"

               


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